श्रीराम वन्दना बालकाण्ड

Author : Neeraj Avinash   Updated: January 29, 2021   2 Minutes Read   27,070

सनातन धर्म के अद्भुत धर्मग्रन्थ श्री रामचरितमानस की रचना संत शिरोमणि तुलसीदास जी ने अवधि भाषा में की थी। पूरी रामकथा विभिन्न दोहो और चौपाइयों में कही गई। इनमें कुछ छंद और सोरठा भी हैं जो इस महाकाव्य में जड़े मोती समान प्रतीत होते हैं।

प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन।
जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥17

श्रीराम वन्दना - प्रथम सोपान (बालकाण्ड)

भावार्थ -

मैं पवनकुमार श्री हनुमानजी को प्रणाम करता हूँ, जो दुष्ट रूपी वन को भस्म करने के लिए अग्निरूप हैं, जो ज्ञान की घनमूर्ति हैं और जिनके हृदय रूपी भवन में धनुष-बाण धारण किए श्री रामजी निवास करते हैं। 

सोरठा क्या है

सोरठा एक मात्रिक छंद है जो दोहा का ठीक विपरीत होता है। सोरठा के विषम चरणों में 11 मात्राएँ होती हैं जबकि सम चरणों में 13 मात्राएँ होती हैं।


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